बुधवार, 1 दिसंबर 2010

मारीना त्स्वेतायेवा की कविताएं

तारों और गुलाबों की तरह

तारों और गुलाबों की तरह
बड़ी होती जाती हैं कविताए
सौदर्य की तरह वे होती है अवांछनीय.

मुकुटों और प्रशस्तियों के बारे में
एक ही उत्तर है मेरे पास
कि वे मुझे क्योंकर मिलेंगे ?

सोए होते है हम जब
अंगीठी के पास से
प्रकट होता है चार पंखुरियों वाला दिव्य अतिथि.

ओ मेरी दुनिया, समझने की कोशिश कर !
सपनों में अनावृत किए हैं गायक ने
तारों के नियम और सूत्र फूलों के.
......

- "आएंगे दिन कविताओं के" से साभार -
मूल रूसी से चयन एवं अनुवाद बरयाम सिंह