गुरुवार, 11 नवंबर 2010

अमृता प्रीतम की नज़्में

१.

आज एक रात --

आज एक रात --
सूरज को ढूंढने चली है
और मैं अकेली
एक दुआ बन कर
इस राह पर खड़ी हूं
.......

२.

जब हर सितारा --

जब हर सितारा --
हर गर्दिश से गुज़र कर
तेरे सूरज के पास आने लगे
तो समझना
यह मेरी जुस्तजु है
जो हर सितारे में नुमायां हो रही...

-"सातवीं किरण" से साभार-
.......

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