बुधवार, 17 नवंबर 2010

बलराज कोमल की उर्दू कविताएं

अनजानी गलियों के पत्थर

उसके पास
रूसवाई के रंगों वाले
दूर-दूर के शहरों की
खबरों वाले
ढेरों खत आया करते
आसमान नीला था
सूरज सुर्ख सुनहरा
नदी का पानी
ख्वाबों की बाते करता
आज अचानक
पिछले पहर आंख खुल गई थी उसकी
और उसे याद आया था
उसके नाम
एक जमाना बीत गया
सरगोशी के जादूवाला कोई खत
नहीं आया
वुह खुद भी
घर की दीवारों में बैठा
दिल की धड़कन सुनता था
अनजानी गलियों के पत्थर गिनता था।
.......

बलराज कोमल की उर्दू कविताएं
-"परिंदो भरा आसमान" से साभार -

साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत उर्दू कविताएं
परिंदो भरा आसमान
कवि एव लिप्यंतरकार
बलराज कोमल

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